Bhagvad Gita – Chapter 2: Sankhya Yoga कर्तव्य और संतुलन

Shloka (Sanskrit):
न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं न पुण्यं च |
इति बोधितोऽहं योगं कुरु कर्म समाचर || 2.47 ||Transliteration:
Na tvahaṃ kāmaye rājyam na swargaṃ na puṇyaṃ ca
Iti bodhito’haṃ yogaṃ kuru karma samācara || 2.47 ||Meaning: Bhagavad Gita Chapter 2
“You have a right to perform your prescribed duties, but you are not entitled to the fruits of your actions. Never consider yourself the cause of the results of your activities, and never be attached to not doing your duty.”
आज Cool Daddy ने सुबह उठते ही महसूस किया कि उनका मन थोड़ा भारी सा है। जैसे हर दिन की भागदौड़ और जिम्मेदारियाँ सिर पर बोझ बनकर बैठ गई हों। School के काम, बच्चों की पढ़ाई, घर के छोटे-मोटे काम और अपने प्रोजेक्ट्स सब कुछ एक साथ।
वो अपनी कॉफी पीते हुए सोच रहे थे –
“मैं तो सिर्फ़ यही हूँ, शरीर और दिमाग़ से भरा हुआ इंसान। क्या मैं इस सबको संभाल पाऊँगा?”
तभी उनकी नजर गीता के द Bhagavad Gita Chapter 2 पर पड़ी। कृष्ण अर्जुन को समझा रहे थे –
“तुम शरीर नहीं हो, तुम आत्मा हो। शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है। शरीर और दिमाग़ की परेशानियाँ असली तुम्हारा स्वरूप नहीं हैं।”
Cool Daddy को लगा – कितनी बार हम अपनी असली शक्ति भूल जाते हैं। छोटी-छोटी परेशानियाँ हमें भारी लगने लगती हैं। लेकिन अगर हम अपने आप को सिर्फ़ शरीर और दिमाग़ मानकर पहचानें, तो डर, थकान और चिंता बढ़ती रहती है। अगर हम समझें कि हम आत्मा हैं, जो हमेशा शांत और स्थिर रहती है, तो वही असली शक्ति है।
आज Cool Daddy ने अपने दिन की शुरुआत सिर्फ़ कामों की लिस्ट से नहीं, बल्कि आत्मा की ताकत को याद करके की। बच्चों के साथ खेलते समय, मीटिंग में निर्णय लेते समय, और खुद के प्रोजेक्ट पर काम करते समय उन्होंने महसूस किया कि मन हल्का और शांत है।
क्या हम भी कभी ऐसा महसूस करते हैं?
- Exam की तैयारी कर रहा Student जो खुद को सिर्फ़ Grades से पहचानता है।
- Parents जो बच्चों की सफलता या असफलता में अपनी खुशी और दुख बांध लेते हैं।
- हम जो सोचते हैं कि हमारी पहचान हमारी नौकरी, पैसा या स्थिति से तय होती है।
गीता का दूसरा अध्याय यही सिखाता है –
हमारी असली पहचान हमारे अंदर है, हमारे कर्म और परिस्थितियाँ सिर्फ़ बाहरी रूप हैं।
👉 अपने दिन की शुरुआत आत्मा की ताकत को याद करके करें।
👉 शरीर और दिमाग़ की थकान को पहचानें, लेकिन उसे अपनी असली पहचान न बनने दें।
👉 हर चुनौती एक अवसर है आत्मा की शांति और स्थिरता को महसूस करने का।
आज का विचार:
“हम शरीर नहीं, आत्मा हैं – यही शांति और शक्ति का असली स्रोत है।”
Cool Daddy ने दिन की शुरुआत हल्के मन से की और सोचा – जीवन के हर काम को सिर्फ़ बाहरी रूप से नहीं, बल्कि अपनी आत्मा की दृष्टि से देखें।
Bhagvad Gita – Chapter 1
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